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Sunday, June 22, 2014

आज बस इतना ही - 23-6-2014


जादू की छड़ी हो तो एक बार घुमा दूं
दुनिया के सारे दर्द अपने नाम लिखा दू

यूं तो कभी मिलते नहीं नदी के किनारे
यादों का एक पुल ही, चलो, इन पे बना दूं

आंखों से हमारी कभी रुकते नहीं आंसू
कोई बताए इस कसूर की क्या सजा दूं

आधी पड़ी है रात, और कंपकंपाती लौ,
आ ज़िंदगी, तुझे मैं आज दिल से दुआ दूं

है पास नहीं कुछ सिवाय ख्वाहिशों के अब
कह दे तो आखिरी ये खजाना भी लुटा दूं

- रमेश तैलंग